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स्वास्थ्य समस्याएं एवं बचाव- यूरिनरि ट्रैक इनफेक्शन

यूरिनरी ट्रैक इनफेक्शन (यूटीआई) स्त्रियों में होने वाली सामान्य स्वास्थ्य समस्या है, जो उपचार के बाद प्राय: ठीक हो जाती है।

कारण

1. स्त्रियों की शारीरिक संरचना इस समस्या का सबसे बडा कारण है। बॉवल और वजाइना के पास होने के कारण बॉवल की त्वचा के आसपास मौजूद बैक्टीरिया यूरेथ्रा के रास्ते होते हुए, ब्लॉडर या यूरिनरी ट्रैक के दूसरे हिस्सों में पहुंच जाता है, जिससे यूटीआई की समस्या होती है।

2. सहवास के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान न रखना भी इसका कारण है।

3. यूरिन के प्रेशर को बहुत देर तक रोक कर रखने से ब्लॉडर के मसल्स पर उनकी क्षमता से अधिक दबाव पडता है, जिससे वे कमजोर पड जाते हैं और यूटीआई की आशंका बढ जाती है।

4. गर्भावस्था और डायबिटीज

लक्षण

1. यूरिन डिसचार्ज करते समय दर्द और जलन महसूस होना

2. बार-बार टॉयलेट जाने की जरूरत महसूस होना

3. रुक-रुक यूरिन डिसचार्ज होना

4. यूरिन के साथ ब्लड आना

5. पेट के निचले हिस्से या कमर में दर्द

बचाव

1. व्यक्तिगत सफाई का ध्यान रखें

2. ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं

3. मिर्च-मसालों का सेवन न करें

4. विटमिन सी में कई ऐसे तत्व होते हैं, जो यूटीआई फैलाने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करने में सहायक होते हैं। अत: इस समस्या से बचने केलिए विटमिन सी युक्त फलों जैसे नीबू, संतरा, मौसमी आदि का सेवन करें।

5. हमेशा कॉटन के थॉन्ग्स पहनें।

6. इस बात का ध्यान रखें कि आपके घर का टॉयलेट हमेशा साफ रहे।

स्वास्थ्य समस्याएं एवं बचाव- सर्विक्स कैंसर

भारत में ज्यादातर स्त्रियां सर्विक्स कैंसर की शिकार होती हैं। यह कैंसर स्त्रियों के गर्भाशय से संबंधित होता है। स्त्रियों को होने वाले कैंसर में लगभग 40 प्रतिशत मामले सर्विक्स कैंसर के ही होते हैं।

कारण

1. व्यक्तिगत सफाई पर ध्यान न देना

2. कम उम्र में विवाह

3. अधिक बच्चे या बार-बार गर्भपात होना

4. धूम्रपान

5. बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन

4. सहवास के दौरान यौन संक्रमण

लक्षण

1. पीरियड्स के अलावा अचानक कभी भी ब्लीडिंग

2. वजाइना से सफेद स्त्राव

3. पेट के निचले हिस्से में दर्द

4. सहवास के दौरान ब्लीडिंग

अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो बिना देर किए किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

बचाव

1. व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें, हमेशा अच्छी क्वालिटी का सैनिटरी पैड और सहवास के दौरान कॉण्डम का इस्तेमाल।

2. अब तक किए गए अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि विटमिन ए की कमी से सर्विक्स कैंसर होने का खतरा रहता है। इसलिए अपने भोजन में विटमिन ए युक्त खाद्य पदार्थो जैसे गाजर, चुकंदर, पपीता, आम आदि जरूर शामिल करें।

3. स्त्री रोग विशेषज्ञ से नियमित रूप से जांच कराती रहें।

4. अब सर्विक्स कैंसर से बचाव के टीके भी उपलब्ध हैं। हालांकि इसकी शत-प्रतिशत सफलता का दावा नहीं किया जा सकता। फिर भी एहतियात के तौर पर आप टीके लगवा सकती हैं।

स्वास्थ्य समस्याएं एवं बचाव- ऑस्टिओपरोसिस

ऑस्टिओपरोसिस

अब तक वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध से यह प्रमाणित हो चुका है कि पुरुषों की तुलना में स्त्रियों को यह समस्या अधिक होती है। स्त्रियों में प्राय: चालीस वर्ष की उम्र के बाद इस समस्या के लक्षण देखने को मिलते हैं।

लक्षण

1. मोटापा

2. उच्च रक्तचाप

3. मेनोपॉज

4. ऊंची एडी के फुटवेयर

5. कै ल्शियम की कमी

लक्षण

1. जोडों में दर्द

2. जोडों में जकडन

3. सूजन

4. चलने, सीढियां चढने, पालथी मार कर जमीन पर बैठने और बैठकर उठने में दर्द और असुविधा महसूस होना

5. चलते समय जोडों से चट-चट की आवाज सुनाई देना

6. मांसपेशियों का कमजोर होना और खडे होते या चलते समय पैरों का असामान्य दिखाई देना। बचाव

1. अपने भोजन में कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थो जैसे- दूध, दही और पनीर आदि दुग्ध उत्पादों को अपने रोजाना के भोजन में जरूर शामिल करें।

2. अंडा, मछली, चिकेन और सफेद रंग के फलों और सब्जियों में भी पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है।

3. डॉक्टर की सलाह पर प्रतिदिन कैल्शियम की गोलियों का सेवन करें।

4. थोडी देर हल्की धूप का सेवन करें, सूर्य की रोशनी में मौजूद विटमिन डी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण की क्षमता को बढाता है। 5. नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और अपना वजन नियंत्रित रखें।

स्वास्थ्य समस्याएं एवं बचाव- मेनोपॉज

मेनोपॉज के दौरान स्त्री के शरीर में हार्मोन संबंधी अनेक बदलाव आ रहे होते हैं, जिसका गहरा प्रभाव उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पडता है।

लक्षण

1. शरीर में तापमान में अनिश्चितता

2. कभी-कभी अचानक बुखार सा महसूस होना और पसीना आना

3. शरीर में एस्ट्रॉजन और प्रोजस्ट्रॉन नामक हॉर्मोन के निर्माण की प्रक्रिया भी धीमी पड जाती है। इससे यूटीआई, बार-बार यूरिन आना और खांसी के साथ यूरिन डिस्चार्ज जैसी समस्याएं होती हैं।

4. हृदय की धमनियों के संकुचित होने से हृदय रोग का खतरा

5. स्मरण शक्ति में कमी, चिडचिडापन और अनिद्रा

6. यौनेच्छा में कमी

7. त्वचा में रूखापन, बालों का झडना और अवांछित बालों की समस्या

बचाव

1. भोजन में गर्म और मसालेदार चीजों का इस्तेमाल न करें, ज्यादा पानी पीने की कोशिश करें, सूती कपडे पहनें।

2. भोजन में हरी सब्जियां, सलाद, अंकुरित अनाज, ताजे फल और जूस नियमित रूप से लें।

3. प्रतिदिन एक ग्लास दूध अवश्य लें क्योंकि इस दौरान कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर पडने लगती हैं।

4. ऐसा सोचना गलत है कि मेनोपॉज के बाद शरीर थक जाता है। डॉक्टर की सलाह के बाद आप नियमित रूप से ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, स्विमिंग, स्किपिंग, साइक्लिंग जैसे सभी व्यायाम बडी सहजता से कर सकती हैं।

स्वास्थ्य समस्याएं एवं बचाव- डिप्रेशन

यह प्रामाणिक सत्य है कि पुरुषों की तुलना में स्त्रियों को यह समस्या ज्यादा प्रभावित करती है। इसके लिए स्त्रियों की शारीरिक संरचना और सामाजिक कारण जिम्मेदार होते हैं।

कारण

1. आनुवंशिकता

2. गर्भनिरोधक गोलियों का लगातार सेवन

3. बचपन की कोई दुखद घटना

4. सामाजिक सहयोग का अभाव

5. शिशु के जन्म के बाद अचानक आने वाली जिम्मेदारी का तनाव

लक्षण

1. गहरी उदासी

2. सामाजिक गतिविधियों में अरुचि

3. यौनेच्छा में कमी

4. निराशावादी और नकारात्मक सोच

5. सेहत के प्रति बेहद लापरवाही

6. अंधेरे में अकेले रहने की इच्छा

7. अनिद्रा या बहुत ज्यादा नींद आना

8. आत्महत्या की प्रवृत्ति

बचाव

1. खुद को किसी न किसी तरह के काम में, व्यस्त रखने की कोशिश करें।

2. अपने कमरे को आकर्षक ढंग से सजाएं, फूलदान में रोज ताजे सुगंधित फूल लगाएं, खुद भी हलके और उदास रंगों के बजाय शोख चटख रंगों वाले ड्रेसेज पहनें, अपना हेयर स्टाइल बदलें। फिर देखिए डिप्रेशन कहां टिकता है आपके पास।

3. उदासी भरे संगीत, साहित्य और फिल्मों से दूर ही रहें तो आपके लिए ज्यादा अच्छा होगा। रोमांटिक संगीत सुनें, बैडमिंटन खेलें, बच्चों के साथ कोई मस्ती भरा इंडोर गेम खेलें और कॉमेडी फिल्में देखें।

4. चाय-कॉफी, एल्कोहॉल और सिगरेट से दूर रहने की कोशिश करें।

5. अगर आपको यह समस्या है तो मनोचिकित्सक से परामर्श जरूर लें।

स्वास्थ्य समस्याएं एवं बचाव- ब्रेस्ट कैंसर

कैंसर का जो प्रकार सबसे ज्यादा स्त्रियों को प्रभावित करता है, वह है- स्तन कैंसर। इंडियन कैंसर सोसायटी द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक मुंबई के अस्पतालों में एक वर्ष के भीतर ब्रेस्ट कैंसर के 6,629 मामले दर्ज किए गए।

कारण

1. देर से विवाह या 30 वर्ष से अधिक उम्र में बच्चे को जन्म देना

2. कम उम्र में पीरियड की शुरुआत या देर से मेनोपॉज होना

3. खानपान के गलत तरीके से शरीर में अतिरिक्त फैट का जमा होना

4. आनुवंशिक कारण

बचाव

1. ब्रेस्ट के हर हिस्से का सावधानीपूर्वक निरीक्षण करें और देखें कि उसमें कोई गांठ या सूजन तो नहीं है।

2. ध्यान से देखें कि स्तनों की संरचना और त्वचा की रंगत में कोई बदलाव तो नहीं दिखाई दे रहा। यह भी देखें कि कहीं धारियां तो नहीं हैं या दबाने पर कहीं गड्ढा तो नहीं पड जाता।

3. अगर कभी निप्पल्स में दर्द, खुजली या किसी तरह का डिस्चार्ज हो तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें।

4. अपनी उंगलियां सीधी रखें और उन्हें ब्रेस्ट के बाहरी दायरे से धीरे-धीरे घुमाते हुए निप्पल्स के आसपास के हिस्से तक ले जाएं। इस तरह स्पर्श से वैसी गांठ के बारे में भी पता चल जाएगा, जो खुली आंखों से दिखाई नहीं देती।

5. इसी तरीके से अंडरऑ‌र्म्स की भी जांच करें क्योंकि ब्रेस्ट कैंसर होने पर इस हिस्से में भी गांठ हो सकती है।

6. अगर आपके परिवार में पहले से किसी को यह बीमारी रही है तो तीस वर्ष की उम्र के बाद तीन वर्ष के अंतराल पर एक बार और चालीस के बाद साल में एक बार मेमोग्राफी जरूर कराएं।

स्वास्थ्य समस्याएं एवं बचाव- ओवेरियन सिस्ट

ओवेरियन सिस्ट की समस्या सभी स्त्रियों को उनके जीवनकाल में कभी न कभी जरूर प्रभावित करती है।

दरअसल ओवरी के भीतर द्रव्य से भरी थैलीनुमा संरचनाएं होती हैं। प्रतिमाह पीरियड के दौरान थैली के आकार की एक संरचना उभरती है, जो फॉलिकल के नाम से जानी जाती है। इन फॉलिकल्स से एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्ट्रॉन नामक हॉर्मोस का स्त्राव होता है, जो ओवरी से मैच्योर एग की निकासी में सहायक होते हैं। कुछ मामलों में पीरियड की निश्चित अवधि खत्म हो जाने के बाद भी फॉलिकल का आकार बढता रहता है, जिसे ओवेरियन सिस्ट कहा जाता है।

कारण

1. आनुवंशिक प्रभाव

2. मोटापा

3. कम उम्र में पीरियड की शुरुआत

4. गर्भधारण में अक्षमता

5. हॉर्मोन्स का असंतुलन

लक्षण

1. पेट के निचले हिस्से में रुक-रुक कर दर्द और भारीपन महसूस होना

2. पीरियड का अनियमित और अधिक मात्रा में ब्लीडिंग होना

3. व्यायाम या सहवास के बाद पेल्विक क्षेत्र में दर्द महसूस होना

4. जी मिचलाना

5. वजाइना में दर्द

उपचार

सिस्ट का उपचार उसके आकार और लक्षणों की गंभीरता के आधार पर किया जाता है। आम तौर पर छोटे आकार वाले सिस्ट दो-तीन महीने के मासिक चक्र के बाद अपने आप दूर हो जाते हैं। लेकिन अगर सिस्ट दो या तीन महीने के बाद भी दूर नहीं होते या मेनोपॉज के बाद यह समस्या हो तो बिना देर किए कुशल स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए, अन्यथा यह सिस्ट कैंसर का रूप धारण कर सकता है। की होल सर्जरी और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा इस समस्या का उपचार संभव है।

स्वास्थ्य समस्याएं एवं बचाव- थायरॉयड

थायरॉयड ग्रंथि हमारी गर्दन के निचले हिस्से में स्थित होती है और इससे एक खास तरह के हॉर्मोन टी 3 और टी 4 का स्त्राव होता है, जिसकी मात्रा के असंतुलन का स्त्रियों की सेहत पर प्रतिकूल असर पडता है।

लक्षण

1. हृदय गति का धीमा या तेज होना

2. हाथों-पैरों का ठंडा रहना

3. त्वचा एवं बालों का खुश्क होना

4. बालों का झडना

5. तेजी से वजन बढना या घटना

6. कब्ज

7. आंखों के चारों ओर सूजन

8. आवाज में भारीपन

9. शारीरिक एवं मानसिक थकान

10. पीरियड से संबंधित अनियमितताएं

11. गर्मी सहन न कर पाना

12. अधिक पसीना निकलना

13. व्यवहार में चिडचिडापन

14. आंखों के सफेद हिस्से का सामान्य से अधिक उभर जाना

उपचार एवं बचाव

निम्नलिखित जांचों द्वारा थायरॉयड ग्रंथि से संबंधित विभिन्न समस्याओं की पहचान की जाती है :

1. सीरम टीएसएच

2. रक्त में टी3 एवं टी4 हॉर्मोस का स्तर

3. फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी

4. थायरॉयड ऑटो-एंटीबॉडीज

5. आइसोटोप स्कैनिंग

6. एमआरआई, सीटी स्कैन अथवा सोनोग्राफी से बीमारी की पहचान की जाती है। अगर आपको थायरॉयड के उपयुक्त लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखाई तो एंडोक्रनोलॉजिस्ट से सलाह लें।

इस समस्या से पीडित स्त्रियां सामान्य जीवन व्यतीत कर सकती हैं। लेकिन उनके लिए नियमित रूप से दवाओं का सेवन करना बहुत जरूरी होता है और डॉक्टर की सलाह अनुसार समय-समय पर अपनी विस्तृत जांच करवाते हुए थायरॉयड ग्रंथि की तत्कालीन क्षमता को मापना अति आवश्यक है।

आपके फैसले जीन के हाथ

हाल ही में यूनीवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में हुए शोध के नतीजे यह थे कि आप जो भी फैसला लेते हैं वह सिर्फ आपके स्वभाव पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि इसके पीछे आपके कुछ जीन भी होते हैं। निर्णय लेने में किसी व्यक्ति की जेनेटिक संरचना महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। शोध टीम के प्रमुख डॉ.जोनाथन रोजर का कहना है कि निर्णय लेना एक जटिल प्रक्रिया है। विशेषकर उस समय जब हम निर्णय के वक्त पसोपेश में पडे हों। रोजर का कहना है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया वास्तव में सेरोटोनिन ट्रांसपोर्टर जीन में उतार-चढाव से प्रभावित होती है। यह प्रक्रिया दिमाग में भावनात्मक प्रतिक्रिया को भी प्रभावित करती है। यू.सी.एल. के अध्ययन के मुताबिक दिमाग का एमिगडाला हिस्सा निर्णय लेते वक्त भावनाओं को सक्रिय कर देता है। इसी से प्रभावित हो हम निर्णय लेते हैं। वे निर्णय सकारात्मक व नकारात्मक दोनों हो सकते हैं।

स्टेम सेल से जुडेंगी हड्डियां

अगर इस दावे को सच मान लें तो निकट भविष्य में हड्डियों की चोट का इलाज बांह पर एक छोटा सा इंजेक्शन लगाकर किया जा सकता है। ब्रिटिश वैज्ञानिक एक ऐसी स्टेम सेल तकनीक का परीक्षण कर रहे हैं, जिसमें रोगी के शरीर में स्टेम सेल्स को इंजेक्ट कर मैगनेट की मदद से निर्देशित किया जाएगा। यह स्टेम सेल घायल हड्डी के पास पहुंच हड्डी और उपास्थि में बदल जाएगा। इस तकनीक में उन स्टेम सेल्स का प्रयोग किया जाता है, जिनमें दूसरे सेल्स के रूप में परिवर्तित होने की क्षमता होती है। इन्हें उसी व्यक्ति के बोन मैरो से लिया जाएगा, जिसमें इन्हें इंजेक्ट किया जाना है। शरीर में इंजेक्ट करने से पहले इन स्टेम सेल्स पर मैगनेटिक कणों की परत चढाई जाती है। एक मैगनेट ब्रेसलेट की मदद से इस स्टेम सेल को शरीर के क्षतिग्रस्त हिस्से तक पहुंचाया जाएगा। यही चुंबकीय क्षेत्र इस सेल को हड्डी या उपास्थि के रूप में परिवर्तित होने में मदद करेगा। इस तकनीक की मदद से फ्रैक्चर और जोडों के रिप्लेसमेंट जैसे मामलों में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। मरीज स्टेम सेल का इंजेक्शन लगाकर घर जा सकता है। अभी तक हड्डियों को जोडने के लिए मेटल प्लेट्स और पिन का इस्तेमाल किया जाता रहा है।

चौडी कमर दिल के लिए नुकसानदेह

यदि आप देखने में ठीक-ठाक हैं तो भी सजग होने की जरूरत है। हाल ही में हुए अध्ययन बताते हैं कि कमर के आसपास चार इंच से ज्यादा चर्बी बढने से दिल की बीमारी होने का खतरा बढ जाता है। शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि जिन स्त्रियों के पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी होती है उनकी दिल की बीमारी का खतरा 15 प्रतिशत तक बढ जाता है। वहीं पेट के पास चर्बी जमा होने वाले पुरुषों को यह खतरा 16 फीसदी बढ जाता है।

शोध में विभिन्न तरह की दिल की बीमारियों और स्वास्थ्य से जुडे मुद्दों पर गौर किया गया। इस शोध में यह बात लगातार उजागर हुई कि वजन बढने से दिल की बीमारी होने के खतरे बढ जाते हैं। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के लिए 45 और 83 साल की आयु के बीच के 80 हजार लोगों की लंबाई, वजन तथा उनकी कमर का नाप लिया गया। निष्कर्ष में पाया गया कि चर्बी युक्त पेट होने से बॉडी मास इंडेक्स वाले लोगों में भी दिल की बीमारी का खतरा 18 प्रतिशत तक बढ गया।

गर्म चाय से सावधान रहें

अधिकतर लोग गर्मागर्म चाय पीने के ही शौकीन होते हैं। ऐसा है तो सावधान हो जाएं। ये गर्म चाय की चुस्कियां गले में कैंसर का फंदा डाल सकती हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपे नए अध्ययन के मुताबिक ज्यादा गर्म चाय पीने से खाने की नली का या गले का कैंसर होने का खतरा आठ गुना तक बढ जाता है। ईरान में चाय बहुत अधिक पी जाती है। वहां जो लोग सिगरेट और तंबाकू का सेवन नहीं करते थे उन्हें भी जब इसोफेगल कैंसर की शिकायत पाई गई तो रिसर्च के दौरान यह सच सामने आया कि तेज गर्म चाय गले के टिश्यूज को नुकसान पहुंचाती है। चाय आंच से उतारने के दो मिनट के भीतर पीने वालों को कैंसर का खतरा उन लोगों से पांच गुना बढ जाता है, जो चार या पांच मिनट के बाद पीते हैं। करीब पचास हजार लोगों की चाय के तापमान पर यह अध्ययन हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार चाय पीने और कप में डालने के बीच दस मिनट का अंतर होना चाहिए।

सखी प्रतिनिधि

स्वास्थ्य समस्याएं एवं बचाव- एनीमिया,

एनीमिया

एनीमिया मुख्यत: आयरन की कमी से ज्यादातर स्त्रियों में होने वाली एक ऐसी बीमारी है, जिसमें हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा घट जाती है।

कारण

1. आमतौर पर स्त्रियां अपने खानपान को लेकर लापरवाह होती हैं। ऐसे में उनके शरीर में आयरन और फॉलिक एसिड की कमी हो जाती है, जिससे वे एनीमिया की शिकार हो जाती हैं।

2. चोट लगने, सर्जरी या पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग से यह समस्या हो सकती है।

3. गर्भावस्था के दौरान अगर आयरन और फॉलिक एसिड का पर्याप्त मात्रा में सेवन न किया जाए तो स्त्रियों में एनीमिया होने का खतरा खास तौर से बढ जाता है।

लक्षण

1. सिरदर्द और थकान महसूस करना

2. अकसर नींद आना

3. चक्कर आना और आंखों के आगे अंधेरा छाना

4. हृदय गति का असामान्य होना

5. कभी-कभी बेहोशी का दौरा पडना

6. भोजन के प्रति अरुचि

7. नाखूनों की रंगत सफेद

8. आंखों के नीचे काले घेरे पडना

बचाव

1. संतुलित और पौष्टिक आहार लें

2. आयरन युक्त खाद्य पदार्थो जैसे-हरी पत्तेदार सब्जियों, फलों और अन्य खाद्य पदार्थो जैसे- रेड मीट, चुकंदर, आंवला, गाजर, सेब, अनार, खजूर, मूंगफली, गुड और सूखे मेवों का सेवन करें।

3. शरीर में फॉलिक एसिड की मात्रा बढाने के लिए कुटू का आटा, ओटमील (जौ), गोभी, मशरूम, ब्रोकली, शहद और एस्पेरेगस खाएं।

4. लोहे की कडाही में सब्जियां पकाएं

5. कैल्शियम और विटमिन सी के लिए दूध, दही, पनीर, चीज के अलावा संतरा, नीबू, मौसमी, चकोतरा और अंगूर जैसे विटमिन सी युक्त फलों का आवश्यक रूप से सेवन करें।

6. डॉक्टर की सलाह पर आयरन और फॉलिक एसिड की गोलियां लें।

7. साल में एक बार अपना हीमोग्लोबिन टेस्ट जरूर करवाएं।

हेल्दी फूड्स

51. अंडा

आधुनिक जीवनशैली में अंडे का कोई विकल्प नहीं है। प्रोटीन से भरपूर होने के साथ-साथ यह ब्लड शुगर को नियंत्रित भी करता है। बिना जर्दी के दो अंडे तथा जर्दी सहित एक अंडा प्रतिदिन ले सकते हैं। अंडे की जर्दी में मौजूद फैट कोलेस्ट्रॉल बढाता है।

52. बादाम

बादाम विटमिन ई का मुख्य स्त्रोत है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता होने के कारण शरीर को स्वस्थ तथा ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करते हैं। बादाम पौष्टिक होने के साथ-साथ कम कैलरी वाले होते हैं।

53. पॉपकार्न

पॉपकार्न मक्खन, नमक और तेल के बिना बेक कर अवन में बनाए जाएं तो यह वजन पर नियंत्रण के लिए फायदेमंद होते हैं। इसे बनाने के तरीके और खाने की मात्रा पर कैलरी निर्भर करती है। बेक करके बनाए चार कप पॉपकार्न में 100 कैलरी और 1 ग्राम फैट होता है। इसकी तुलना में चार कप आलू के बेफर्स में 600 कैलरी व 40 ग्राम फैट होता है। अब आलू कैसे खाना है, जान लें।

54. सैलेड

अमेरिकन डाइटिक एसोसिएशन का मानना है कि सब्जियों से बने सैलेडे विटमिन सी और ई के साथ फॉलिक एसिड और कैरोनटॉयड्स से भरपूर होते हैं। यह सैलेड गाजर, टमाटर, बंदगोभी, शिमला मिर्च, लैटयुस और खीरा जैसी सब्जियों से बना हो तो कैलरी तो कम होती ही है, साथ ही ये आपको पूरी ऊर्जा भी देते हैं। हर मील में एक बोल या एक बडी सर्विग सैलेड की जरूर लें। स्वाद के लिए ड्रेसिंग में नीबू या दही का इस्तेमाल कर सकती हैं।

55. आलू

वास्तव में समस्या आलू से नहीं उसे पकाने के तरीकों से जुडी है। फिंगर चिप्स व इस तरीके से बनाया आलू वसा युक्त तथा वजन बढाने वाला होता है। यदि आलू भून कर या उबालकर खाया जाए तो इससे बेहतर और कोई डाइट नहीं। एक बडे या दो छोटे आलू (करीब 100 ग्राम) में 97 कैलरी होती है। यह आलू ही है जो बच्चों से बडों तक सभी को भाता है। यह सब्जियों का राजा है।

56. टोफू भूख से जुडी समस्याओं के लिए प्रोटीन युक्त टोफू बेहतरीन है। विशेषज्ञ सप्ताह में तीन से चार बार 50 ग्राम टोफू खाने की सलाह देते हैं।

57. पानी

अनेक शोध ने इस बात की पुष्टि की है कि पानी पीने के असंख्य फायदे हैं। यह कैलरी में शून्य है लेकिन पेट भरने में सक्षम है। जिनसे सादा पानी नहीं पिया जाता वे नारियल पानी, नीबू पानी के साथ फलों और सब्जियों का जूस व मट्ठा भी ले सकते हैं। इनमें कैलरी भी कम होती है और पेट भी भरा लगता है।

58. अधिक फाइबर युक्त सीरियल्स फाइबर, प्रोटीन, आयरन और फोलेट युक्त भोजन मांसपेशियों को मजबूत बनाने तथा फैट को कम करने में मदद करता है। पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। इसलिए साबुत अनाज का सेवन अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। दरअसल इसे कितनी मात्रा में खाएं यह हर व्यक्ति की जरूरत और क्षमता के हिसाब से तय किया जाता है। सामान्य रॅन्प से इसकी तीन सर्विग प्रतिदिन ले सकती हैं।

59. दही

मक्खन रहित दूध से बनी एक बोल दही में केवल 56 कैलरी होती है। यह प्रोटीन, कैल्शियम और विटमिन का बेहतरीन स्त्रोत है। इपने भोजन में इसे शामिल करना न भूलें।

60. ग्रीन टी

हर्बल टी एंटीऑक्सीडेंट से युक्त होती है। यह मेटाबॉलिज्म को मजबूत करती है तथा चर्बी को घटाती है।

सखी प्रतिनिधि

पौष्टिकता ए से जेड तक

ए- एपल

एक एपल (सेब) रोज खाइए और डॉक्टर से दूर रहिए-यह कथन सही है, क्योंकि इसमें कैलरी के साथ कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है व फाइबर भरपूर होता है। अस्थमा में सेब खाना फायदेमंद है। पेट खराब होने पर लाभदायक उपचार है सेब। यदि डायबिटीज थोडी-बहुत है तो भी सेब खाने की सलाह डॉक्टर देते हैं। शिशुओं के लिए स्टीम किया हुआ सेब पूर्ण आहार है। प्रतिदिन सेब खाने से कैंसर जैसे रोग से भी बचा जा सकता है।

बी- बनाना

बनाना (केला) स्त्रियों के लिए तनाव दूर करने की दवा है। इसमें से अमीनो एसिड, ट्रिप्टोफेन सेरोटोनिन केमिकल का रिसाव होता है, जिससे पूरे शरीर मेंठंडक का एहसास होता है। इसमें पोटैशियम होता है जो ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है और दिल के रोगी होने से बचाता है। यह नाश्ते के लिए संपूर्ण आहार है जो ऊर्जा से भरपूर होता है।

सी-कैबेज

बे्रस्ट कैंसर और कोलोन कैंसर से दूर रहने के लिए लाभदायक होता है। कैबेज (बंदगोभी) एस्ट्रोजेंट से होने वाली बीमारियों से भी दूर रखता है। इसमें सल्फर और क्लोरीन ज्यादा होता है। आयोडीन की मात्रा भी अधिक होती है। यह अलसर को दूर करता है, ओबेसिटी व त्वचा संबंधी दिक्कतों को दूर करता है। ध्यान रहे कि इसे बनाने से पहले अच्छी तरह खुले पानी से धोएं जरूर।

डी-डेट्स

डेट्स (खजूर) में पोटेशियम, आयरन, नियासीन और विटमिन बी 6 होता है। फाइबर की अधिक मात्रा से युक्त इसमें प्राकृतिक शुगर भी अधिक होता है।

ई-एग

बर्ड फ्लू के कारण भले ही एग (अंडे) से डर लग रहा हो लेकिन यह न्यूट्रीशन का मुख्य स्त्रोत है। इसमें प्रोटीन, विटमिन ए, बी और डी, जिंक, आयरन और फॉलिक एसिड भी होता है। डर दूर करने के लिए इसे न तो कच्चा खाएं, न ही आधा पका।

एफ- फिश

उत्तम प्रोटीन के लिए मछली से अच्छा स्त्रोत और कोई नहीं। बालों व स्किन के लिए फायदेमंद है। स्ट्रोक व हार्ट अटैक से बचाव करती है। थायरॉयड में फायदा पहुंचाती है। ऑयली फिश जैसे मैकरिल विटमिन ए और डी का अच्छा स्त्रोत है। ओमेगा थ्री फैटी एसिड इसमें प्राकृतिक रूप से मौजूद है, जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है।

जी- जिंजर

अधिकतर गर्भवती स्त्रियों को मॉर्निग सिकनेस का सामना करना पडता है जिसके लिए लाभदायक होता है जिंजर (अदरक)। बहुत लंबे समय से बहुत सी दवाओं में इसका प्रयोग किया जा रहा है। जिंजर पाचन क्रिया को भी ठीक करता है।

एच- हर्ब

हर्ब यानी जडी-बूटियों का अधिकतर प्रयोग सैलेड में होता है। इससे न केवल वह आकर्षक दिखता है बल्कि फायदा भी पहुंचाता है। इनमें ताकतवर फाइटोकेमिकल और एंटीबॉयोटिक तत्व होते हैं, जो सेहत के लिए लाभकारी होते हैं। ये इम्यून सिस्टम को ठीक करते हैं। हर्ब का इस्तेमाल सैलेड, इसके बाद चाय में होता है। बेसिल और अदरक की चाय सिर दर्द व कैमोमाइल चाय तनाव दूर करने में सक्षम होती है।

आई- इंडियन गूसबेरी

तेज फ्लू को दूर करने में विटमिन सी की अधिकमात्रा चाहिए होती है, जो इंडियन गूसबेरी (आंवला) में मिलती है। बीमार होने की प्रवृत्ति को कम करता है यह। इसके फायदों को आप जान लेंगी तो हैरान रह जाएंगी। किसी भी अन्य पौष्टिकआहार से ज्यादा पोषक तत्व इसमें होते हैं। आंवले के गुणों पर नजर डालें तो देखेंगे कि इससे हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और रोगों से लडने की शक्ति मिलती है।

जे- जैकफ्रूट

पोटेशियम से भरपूर होने के कारण यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। इसमें फाइटोन्यूट्रीएंट तत्व कैंसर से बचाते हैं। अस्थमा में आराम देता है। त्वचा की अनेक समस्याओं का इससे इलाज होता है।

के- किवी

किवी फ्रूट में विटमिन सी, पोटैशियम, कॉपर, फाइबर के साथ मैग्नेशियम और विटमिन ई भी मौजूद होते हैं। वयस्कों में किवी का सेवन ट्राइग्लीसराइड बनने पर अंकुश लगाता है तथा ब्लड क्लॉट यानी खून का थक्का भी नहीं बनने देता। न केवल बडों में बल्कि बच्चों को भी यह सही पोषण देने में मदद करता है। भले ही ये बहुत आसानी से न मिलता हो लेकिन खास है गुणों में।

एल- लेमन

लेमन (नीबू) सिट्रस फल है। नीबू के रस में विटमिन सी बहुत मात्रा में होता है। नीबू का रस इनफ्लूएंजा, मलेरिया और जुकाम में फायदा देता है, बुखार को कम करता है, दांत, दिल और बोन के लिए हितकारी है, किडनी व ब्लैडर के रोगों के साथ नर्वस सिस्टम को आराम देता है।

एम- मैंगो

मैंगो (आम) फलों का राजा है। एक अच्छा नाश्ता व उपयोगी डेजर्ट होता है, विशेषकर मीठा खाने वालों के लिए। स्वास्थ्य के लिए लाभकारी रसायनों का बेहतर स्त्रोत है। पाचन क्रिया में भी फायदा पहुंचाता है यह।

एन- नट्स

नट्स (सूखे मेवे) उन बेहतर स्नैक्स में से एक है जिसे खाने से आपको पेट भरा लगता है। इसमें विटमिन ई होता है जो स्किन के लिए फायदेमंद है व हड्डियों को कैल्शियम देता है।

ओ- अनियन

अनियन (प्याज) में क्यूरसेटिन होता है जो एंटीऑक्सीडेंट तत्वों से युक्त होता है व खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। लाल प्याज में पीले प्याज की तुलना में अधिक क्यूरसेटिन होता है। प्याज खाने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है व अस्थमा में आराम मिलता है।

पी- पपाया

पपाया (पपीते) में विटमिन ए, बी व सी, बीटा कैरोटिन तथा पपेन होता है जो एंजाइम के लिए फायदेमंद होता है। पपीता पाचक तथा भूख बढाने वाला होता है। यह लीवर के लिए भी फायदेमंद है। सुपाच्य होने के कारण हर समय इसे खाने की सलाह डॉक्टर देते हैं।

क्यू- क्विनोआ

क्विनोआ (एक प्रकार का अनाज) में पोटैशियम व आयरन होता है। इसमें विटमिन बी, विशेषकर बी 6, नियासिन और थियामिन भी रहता है। यह प्रोटीन से युक्त खाद्य है, जिसका इस्तेमाल कुकीज, ब्रेड, पास्ता, केक व बिस्किट बनाने में होता है। इसके पत्ते सैलेड में इस्तेमाल होते हैं।

आर- रैडिश

रैडिश (मूली) बंदगोभी, गोभी और शलजम के परिवार की सब्जी है। स्वाद में उम्दा व कम कैलरी वाली होती है यह। इससे बने नाश्ते उत्तम होते हैं। किसी भी सैलेड, सूप और सब्जी में इसे डालने से जहां रौनक बढती है वहीं स्वाद भी बेहतर होता है। विटमिन सी इसमें भरपूर होता है, इसमें आयरन, पोटैशियम, बीटा कैरोटीन और फाइबर भी होता है।

एस- स्पिनच

स्पिनच यानी पालक लोगों की पसंदीदा हरी सब्जी है। इसमें फोलेट अधिक होता है। इसमें मौजूद विटमिन बी हार्ट डिजीज को कम करता है। इसमें ल्यूटीन भी बहुत होता है जिससे उम्र अधिक होने पर नेत्र दृष्टि कम होने वाली समस्या पर रोक लगती है।

टी- टोमैटो

टोमैटो यानी टमाटर में लाइकोपीन, कैरोटनॉयडस होते हैं जो दिल के रोग व कैंसर को दूर करने में मददगार होते हैं। इस तरह की सब्जियां डायबिटीज में, नेत्र रोग में, यूरिनरी डिसॉर्डर में, इंटेंस्टाइन व लिवर की समस्याओं में और जोडों के दर्द में फायदा पहुंचाती हैं। यह नाडी के लिए अच्छा टॉनिक व रक्तशोधक है।

वी- वेजटेबल्स

एक दिन में सब्जियों व फलों से मिलने वाले निम्न पांच पोर्शन यदि आप खाते हैं तो आप कैंसर व हार्ट अटैक के खतरों से बच सकते हैं। 80 ग्राम के एक सैलेड बोल जिसमें 3 टेबल स्पून मटर, 2 मुट््ठी बंदगोभी, दो मुट््ठी सैलेड पत्ता, एक बोल छोटे कॉर्न के दाने, एक टोमैटो हो व एक चम्मच टोमैटो प्यूरी हो।

डब्लू- वॉलनट

वॉलनट (अखरोट) सबसे अलग हैं। इसमें ओमेगा थ्री व ओमेगा सिक्स के साथ पॉलीसैचुरेटेड फैटी एसिड भी होते हैं। ये हार्ट अटैक के खतरे और खराब कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है।

वाई- योगर्ट

योगर्ट यानी दही स्वास्थ्यवर्धक है और मिनरल व विटमिन का बेहतर स्त्रोत भी। कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटमिन ए, बी और जिंक इसमें होते हैं व यह पचाने में दूध से ज्यादा आसान होती है विशेषकर उनके लिए जिनको दूध पचता न हो। इसमें एक्टिव बैक्टीरिया होते हैं जो नुकसानदेह तत्वों से बचाते हैं।

जेड- जुकीनी

रॉ जूकिनी में कम कैलरी के साथ फोलेट, विटमिन सी, पोटेशियम होता है। यह कैरोटीन का अच्छा स्त्रोत है व कैंसर से लडने के लिए एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी होते हैं इसमें। पीली व हरी जूकिनी बेहद पौष्टिक होती है।

डाइटीशियन शेरोन अरोडा

सखी प्रतिनिधि

टमी ट्रिमिंग एक्सरसाइज

टोंड और सपाट पेट हर स्त्री की तमन्ना होती है। इसलिए फिटनेस रेजीम में एब्डॉमिनल ट्रेनिंग सबसे अहम होती है। तो क्या है सुंदर सपाट एब्स का राज? जानिए यहां दी गई एक्सरसाइज अपना कर। बेहतर एब्स के लिए तीन सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैं-

1. एब्डॉमिनल मसल्स को दुरुस्त करने के लिए अलग-अलग तरह का वर्कआउट करें।

2. खाने की आदत को सुधारें (पौष्टिक और संतुलित लो फैट आहार लें।)

3. कैलरी नष्ट करने के लिए कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज करें। जैसे टहलना।

खुद से करें दो सवाल

1. क्या मैं पेट पर जमा चर्बी को कम नहीं कर सकती। मुझे क्या करना चाहिए?

चर्बी कम करने का सबसे उपयुक्त तरीका है खानपान पर ध्यान देना और एक्सरसाइज करना। कैलरी को कम करके, ध्यान से खाने और नियमित एक्सरसाइज से इसे कम किया जा सकता है।

2. जब हम पेट कम करना चाहते हैं तो पीठ को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज की जरूरत क्यों होती है? जब कि हमें सिर्फ कसा हुआ पेट चाहिए? यह बात हमेशा ध्यान रखें कि जब आप एब्डॉमिनल ट्रेनिंग करें तब पीठ की मांसपेशियों को दुरुस्त रखने की एक्सरसाइज करना न भूलें। मजबूत पीठ और एब्स के लिए शरीर में मांसपेशियों का संतुलन बेहद जरूरी होता है। उदाहरण के लिए यदि आपने एब्स की एक्सरसाइज कर ली और आप बैक ट्रेनिंग भूल गई तो आपकी पीठ की मांसपेशियां कमजोर पड जाएंगी।

आप अपनी टमी कम करने के लिए अपनाएं ये 10 एक्सरसाइज-

21. एब्डॉमिनल क्रंच

पीठ के बल लेट जाएं। अपने घुटनों को मोड लें। अपने हाथों को मोडकर सिर के नीचे रख लें। अपने कंधों को जमीन से थोडा ऊपर की तरफ उठाएं। फिर पहली जैसी स्थिति में आएं। इसे 12 बार दोहराएं।

22. रिवर्स कर्ल

पीठ के बल लेट जाएं। घुटनों को मोडकर उठाएं। 90 डिग्री का कोण बनाएं। अपने हिप्स (नितंबों) व घुटनों को अपनी छाती के आगे लगाएं। धीरे-धीरे पूर्व स्थिति में आएं।

23. ऑब्लीक्स

पैरों को फैलाकर पीठ के बल लेट जाएं और अपने हाथ सिर के पीछे गले को सहारा देते हुए रखें। एब्स को छूने के लिए अपने कंधों को जमीन से ऊपर उठाएं। अब अपने बाएं कंधे को अपने बाएं घुटने के पास ले जाने की कोशिश करें। इसी तरह दूसरी तरफ से दोहराएं। ऐसा 12 बार पैर को बदल कर करें।

24. ऑब्लीक वैरिएशन

पैरों को फैलाकर पीठ के बल लेट जाएं। अपने हाथों को सिर के नीचे गर्दन को सहारा देते हुए रखें। सांस खींचते हुए अपने कंधों को जमीन से ऊपर उठाएं। फिर अपने बाएं कंधे को दाहिने घुटने के पास ले जाएं और दाहिने कंधे को बाएं घुटने की ओर ले जाने की कोशिश करें। यह प्रक्रिया 12 बार दोहराएं।

25. बॉल के साथ क्रंच करें

जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं और अपने घुटनों को उठाकर 90 डिग्री का कोण बनाते हुए उठाएं। पीठ के निचले हिस्से पर हलका दबाव डालें। ठोढी को ऊपर उठाएं। इसके बाद अपनी हथेलियों से एक गेंद को पकडें और उसके सहारे उठने की कोशिश करें। अपने पेट में खिंचाव महसूस करें और फिर पूर्व स्थिति में आएं। ऐसा 16 बार करें।

26. कमर को मोडें

सीधी खडी हो जाएं और दोनों हाथों में पानी की बोतल पकडें। फिर अपनी कमर को दाहिनी ओर झुकाएं। पूर्व स्थिति में आएं। 16 बार ऐसा करें। फिर बायीं ओर झुकें। पूर्व स्थिति में आएं। ऐसा 16 बार करें।

27. बैक एक्सटेंशन

पेट के बल लेट जाएं और अपने हाथों को पीठ के निचले हिस्से पर रख लें। अब पैर से ऊपर के शरीर को जमीन से ऊपर की ओर उठाएं। लेकिन अपनी निगाह जमीन पर टिकाएं और ठोढी को आराम की मुद्रा में रखें। धीरे-धीरे पूर्व स्थिति में आएं। ऐसा 10 बार करें।

28. ऑल्टरनेट लेग रेज

पहले बाएं पैर को उठाएं और नीचे लाएं। फिर अपने दाहिने पैर को उठाएं और नीचे लाएं। इस प्रकार दोनों पैरों से 10 बार करें।

29. ऑल्टरनेट आर्म एंड लेग रेज

पेट के बल लेट जाएं। अपना बायां हाथ और दाहिना पैर उठाएं। दोनों को सीधा रखें। धीरे-धीरे पूर्व स्थिति में आएं। अब अपना दाहिना हाथ और बायां पैर उठाएं। पूरा एक सेट 10 बार दोहराएं।

30. ब्रिज

चटाई पर लेट जाएं और हिप्स और पीठ को इतना ऊपर उठाएं कि पुल जैसा बन जाए। 10 सेकंड केलिए रुकें। फिर पूर्व स्थिति में आएं। ऐसा 3-4 बार करें।

ध्यान दें

1. व्यायाम के समय सांस सही प्रकार से लें। कभी अपनी सांस को रोक कर मत रखें।

2. जब आप सांस छोडती हैं या अंदर लेती हैं तब अपनी मांसपेशियों को ढीला न छोडें। एक्सरसाइज की प्रक्रिया शुरू करते समय सांस खींचें और खिंचाव महसूस करें। फिर धीरे से छोडे। जैसे गर्दन को घुटनों तक लाते हुए सांस खीचें और पूर्व स्थिति में आपने पर सांस छोडें।

3. पेट कम करने के लिए भोजन का त्याग न करें। शरीर को हर प्रकार के भोजन की जरूरत होती है।

(लेखिका मुंबई की फिटनेस इंस्ट्रेक्टर हैं)

नमिता जैन

झुर्रियों से बचाए संतरा

शोधकर्ता बताते हैं कि यदि आप प्रतिदिन एक संतरे का सेवन करती हैं, तो इससे झुर्रियां रोकने में मदद मिल सकती है। संतरे में मौजूद विटमिन सी से त्वचा देर से बूढी होती है। यह शोध ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने की। उन्होंने 40 से 74 वर्ष आयु वर्ग की चार हजार से अधिक स्त्रियों पर शोध किया। शोध में देखा गया कि विटमिन सी से युक्त खाद्य पदार्थ खाने वाली स्त्रियों में झुर्रियां कम देखी गई। विटमिन सी एक ऐसा एंटीऑक्सीडेंट है जो कोलाजेन के सिंथेसिस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दरअसल कोलाजेन नामक प्रोटीन त्वचा को लचीला बनाए रखने में मदद करता है। कोलाजेन हड्डियों, कार्टिलेज, मसल और रक्तवाहिनियों का ढांचा भी तैयार करने में सहयोग देता है।

शारीरिक समस्या, मानसिक कारण

त्वचा रोग, सिर दर्द, पेट की गडबडियां यहां तक कि दमा का भी संबंध आपके मस्तिष्क से है, क्या यह आपको पता है?

बहुत सी ऐसी बीमारियां हैं जो मनोमस्तिष्क से जुडी होती हैं और शरीर को लगातार प्रभावित करती रहती हैं। इन्हें साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर कहते हैं। इसकी खोज सदियों पहले एक ग्रीक फिजिशियन ने की थी। इसके लिए उन्होंने शरीर, मस्तिष्क और परिस्थितियों सबका एक साथ इलाज किया था। जैसे इंसानी त्वचा रक्तवाहिनियों से भरी होती है तथा मानसिक तनाव के प्रति बेहद संवेदनशील होती है। इसलिए मनोभावों का सीधा असर त्वचा पर दिखाई पडता है।

भले ही साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर को किसी खास श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, यह कई रूप में सामने आ सकती है। जैसे सामाजिक और मनोवैज्ञानिक तनाव के चलते दमा, पीठ दर्द, धमनी, हृदय संबंधी बीमारियां, मांसपेशियों की ऐंठन, डायबिटीज, एग्जिमा, गैस्ट्रिक समस्या, हाई ब्लड प्रेशर तथा अल्सर आदि शारीरिक बीमारियां परेशान कर देती हैं।

अधिक बियर और कॉफी घटाए शुक्राणु

हाल ही में हुई ब्रिटिश शोध से पता चला है कि बियर, रेड वाइन और यहां तक कि कैफीन के अधिक सेवन से पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या घट सकती है। इस अध्ययन में पता चला कि बियर, रेड वाइन और कैफीनेटेड ड्रिंक्स जैसे कॉफी में महिला हार्मोन एस्ट्रोजन जैसे नेचरल केमिकल्स अत्यधिक मात्रा में होते हैं। ये फाइटोएस्ट्रोजंस हैं, जो पुरुष फर्टिलिटी को प्रभावित करते हैं। एक बात हैरान करने वाली थी कि अध्ययन में बताया गया कि यदि इन ड्रिंक्स के साथ भुनी मूंगफली खाई जाए तो ये और अधिक नुकसानदेह साबित हो सकते हैं, क्योंकि भुनी मूंगफली में भी कुदरती तौर पर वानस्पतिक कंपाउंड फाइटोएंस्ट्रोजंस की मात्रा ज्यादा होती है। ध्यान देने योग्य बात है कि आइसोफ्लैवांस नामक खास किस्म का फाइटोएस्ट्रोजन पुरुषों में स्त्री हार्मोन एस्ट्रोजन जैसा प्रभाव डालने लगता है। जिसकी वजह से पुरुषों में स्त्री हार्मोन का लेवल बढ जाता है तथा शुक्राणुओं की संख्या घटने लगती है। संतान की कामना रखने वाले सचेत रहें।

मिट्टी है अनमोल

इसमें संदेह नहीं कि मिट्टी से इलाज करने का तरीका सदियों पुराना है। अब मिट्टी के औषधीय गुणों को वैज्ञानिक फिर से परिभाषित करने का प्रयास कर रहे हैं। वास्तव में प्रकृति द्वारा प्रदत्त मिट्टी फ्लेश ईंिटंग कीटाणु (एम अल्सरांस) से मुकाबला करती है। मिट्टी एमआरएसए नामक जर्म से भी लड सकती है। अब माइक्रो बायोलॉजिस्ट और मिनरलॉजिस्ट इस बात की तह तक जाना चाहते हैं कि मिट्टी किस प्रकार इलाज में सहायता करती है। जांच रिपोर्ट यह बताती है कि मिट्टी से तमाम इन्फेक्शंस का इलाज संभव है। स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के प्रोफेसर के अनुसार विशेष मिट्टी ने इंसानों में कई बीमारियों के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया को मार डालने में सक्रिय भूमिका अदा की। एक खबर के अनुसार फ्रांस के ज्वालामुखी से निकलने वाली मिट्टी त्वचा के अनेक रोगों को ठीक करने में सक्षम पाई गई। उनके मुताबिक मिट्टी से 99 फीसदी कीटाणुओं का खात्मा हो सकता है। इस मिट्टी की सहायता से जानलेवा बीमारियों के कीटाणुओं को 24 घंटे के अंदर समाप्त किया जा सकता है।

सखी प्रतिनिधि

जरूरी है प्री प्रेग्नेंसी काउंसलिंग

गर्भावस्था के दौरान प्राय: सभी स्त्रियां अपने खानपान का ध्यान रखती हैं लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती कि स्वस्थ शिशु के जन्म के लिए यह बहुत जरूरी है कि गर्भधारण के पहले से ही अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखा जाए। अगर आप भी अपना परिवार बढाने की योजना बना रही हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें :

1. आप जिस माह में कंसीव करना चाहती हैं, कम से कम उसके तीन माह पहले से आपको अपने खानपान के प्रति सतर्क हो जाना चाहिए। अपने रोजाना के भोजन में कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन की मात्रा बढाएं। इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, मिल्क प्रोडक्ट्स और फलों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें।

2. प्री प्रग्नेंसी काउंसलिंग के लिए पति-पत्नी दोनों को स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए। वहां डॉक्टर द्वारा इस बात की पूरी जानकारी हासिल की जाती है कि पति-पत्नी को बचपन में लगाए जाने वाले सारे टीके लग चुके हैं या नहीं? अगर किसी स्त्री को रूबेला का वैक्सीन नहीं लगा हो तो कंसीव करने से पहले उसे यह टीका लगवाना बहुत जरूरी होता है। लेकिन यह वैक्सीन लगवाने के बाद कम से कम तीन महीने तक कंसीव नहीं करना चाहिए।

3. गर्भधारण से पहले स्त्री के लिए डायबिटीज की जांच बहुत जरूरी है क्योंकि अगर मां को यह समस्या हो तो बच्चे को भी डायबिटीज होने की आशंका रहती है। यही नहीं बच्चे की आंखों पर भी इसका साइड इफेक्ट हो सकता है।

4. अगर कोई स्त्री गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती है तो उसे कंसीव करने से कम से कम तीन महीने पहले से इन गोलियों का सेवन बंद कर देना चाहिए।

5. कंसीव करने के कम से तीन महीने पहले से डॉक्टर की सलाह के अनुसार फॉलिक एसिड का सेवन शुरू कर देना चाहिए। क्योंकि सबसे पहले बच्चे का मस्तिष्क और उसकी रीढ की हड्डी का निर्माण शुरू हो होता है और इसे बनाने में फॉलिक एसिड की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह बच्चे के विकास के लिए ऐसा आवश्यक तत्व है कि इसकी कमी से बच्चे को नर्वस सिस्टम से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।

6. ज्यादातर भारतीय स्त्रियों को एनीमिया की समस्या होती है और हीमोग्लोबिन की कमी के कारण मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है। इसलिए गर्भधारण से पहले स्त्री के लिए फुल ब्लड काउंट टेस्ट बहुत जरूरी होता है।

7. गर्भधारण से पहले पति-पत्नी दोनों को थैलेसीमिया की जांच जरूर करवानी चाहिए। यह आनुवंशिक बीमारी है। अगर पति-पत्नी दोनों को थैलेसीमिया माइनर हो तो इससे बच्चे को मेजर थैलेसीमिया होने का खतरा होता है, जो कि एक गंभीर बीमारी है और रोगी को हर तीन महीने के अंतराल पर ब्लड टांसफ्यूजन की आवश्यकता होती है।

8. पति-पत्नी दोनों के लिए एचआईवी टेस्ट करवाना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि अगर मां एचआईवी पॉजिटिव हो तो बच्चा भी इसका शिकार हो सकता है।

9. हेपेटाइटिस बी यौन संक्रमण से फैलने वाला रोग है। इसलिए पति-पत्नी दोनों को इसकी जांच करवानी चाहिए और इसके टीके भी जरूर लगवा लेने चाहिए।

10. कंसीव करने से पहले स्त्री के लिए सिफलिस की जांच भी जरूरी है। क्योंकि इससे डिलिवरी के समय कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं।

11. बच्चे के लिए प्लानिंग करते समय पति-पत्नी दोनों ही एल्कोहॉल और सिगरेट से दूर रहें। स्त्री को इस मामले में विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि इससे शारीरिक और मानसिक रूप से विकृत शिशु के जन्म या मिसकैरेज की आशंका रहती है।

12. अगर आपके या पति के परिवार में किसी खास बीमारी की फेमिली हिस्ट्री रही है तो उसके बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं।

13. अगर आप अपनी किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए नियमित रूप से किसी दवा का सेवन करती हैं तो उसके बारे में भी अपनी डॉक्टर को जरूर बताएं।

14. मां बनने से पहले हर स्त्री को अपने वजन पर ध्यान देना चाहिए। वजन बीएमएस (बॉडी मॉस इंडेक्स) के अनुसार पूरी तरह संतुलित होना चाहिए। ओवरवेट या अत्यधिक दुबलापन ये दोनों ही स्थितियां गर्भाधारण के लिए नुकसानदेह मानी जाती हैं। अगर स्त्री का वजन बहुत ज्यादा हो तो इससे प्रीमेच्योर डिलिवरी की आशंका बनी रहती है, वहीं कम वजन के कारण भी गर्भावस्था के दौरान उसे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड सकता है।

15. अगर पति-पत्नी दोनों में से किसी को भी डिप्रेशन, हाइपरटेंशन या किसी भी तरह की कोई मनोवैज्ञानिक समस्या हो तो आप उसके बारे में भी डॉक्टर को जरूर बताएं। क्योंकि ऐसी समस्याओं के कारण बच्चे के जन्म के बाद उसकी सही परवरिश में दिक्कतें आ सकती हैं। इसलिए जब आप प्री प्रेग्नेंसी काउंसलिंग से पूरी तरह संतुष्ट हो जाएं तभी अपने पारिवारिक जीवन की शुरुआत करें।

(दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञा डॉ. निकिता त्रेहन से की गई बातचीत पर आधारित)

विनीता

स्वस्थ तन-मन के लिए रखें उपवास

उपवास सदियों से हमारी जीवनशैली का एक हिस्सा है। ऋतुएं बदलने पर भी उपवास रखना अच्छा माना जाता है। भले ही आज इसे हम अंधविश्वास मानें, लेकिन ये परंपराएं वैज्ञानिक आधार पर हमें स्वस्थ रखने के लिए बनाई गई थीं। हालांकि आज हम इनका वास्तविक अर्थ भूलते जा रहे हैं। उपवास तन-मन को स्वस्थ व प्रसन्नचित्त रखने के लिए आवश्यक है। सप्ताह में केवल एक दिन उपवास रखने से कई रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है।

उपवास का लाभ

हम जानते हैं कि शरीर में धीरे-धीरे विषैले तत्वों का जमाव होता रहता है। रक्त का काम शरीर के विभिन्न अंगों की कोशिकाओं को पोषण व ऑक्सीजन उपलब्ध कराना और विषैले तत्वों एवं कार्बन-डाई-ऑक्साइड को ढोकर ले जाना है। कार्बन-डाई-ऑक्साइड गैस फेफडों द्वारा श्वसन क्रिया के फलस्वरूप शरीर से बाहर निकल जाती है, फिर गुर्दे विषैले तत्वों को छानकर मूत्र द्वारा बाहर निकाल देते हैं। उपवास के दौरान विषैले तत्वों का जमाव रुक जाता है। पहले से जमा विषैले तत्वों का निष्कासन तेजी से होने लगता है। इससे शरीर में चुस्ती-फुर्ती और हलकापन आता है।

इन बातों का ध्यान रखें

1. उपवास के दौरान पानी ज्यादा पीना चाहिए, ताकि गुर्दे ठीक से काम करें और विषैले तत्व शरीर से बाहर निकल सकें। इससे न तो त्वचा की नमी कम होगी और न ही डिहाइड्रेशन होगा।

2. पूर्ण उपवास न रखें। नींबू-पानी, फलों व सब्जियों का रस लेते रहें। इससे शरीर में हलकापन आने के साथ-साथ आवश्यक ऊर्जा व विटमिंस मिलते रहते हैं और सामान्य कामकाज करने में थकावट नहीं महसूस होगी।

3. उपवास के अगले दिन हलका भोजन लें। मसालेदार या मांसाहारी भोजन, फास्ट फूड्स, अत्यधिक खट्टे पदार्थ या मिठाई न लें, ताकि आंतें सुचारु रूप से अपना कार्य करती रहें।

4. मोटापा कम करने के लिए लंबा उपवास न रखें। इससे शरीर में अनिवार्य ऊर्जा, मिनरल्स व विटमिंस की कमी होती है। उपवास के शुरुआती दिनों में वजन कम होता है, क्योंकि जल तत्व की कमी होती है, लेकिन कुछ समय बाद वह स्थिर हो जाता है।

5. उपवास करने वाली स्त्रियों को वसा, फास्ट फूड एवं मांसाहार से परहेज रखना चाहिए और अपने भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियों, फलों और सैलेड की मात्रा बढानी चाहिए एवं नियमित व्यायाम करना चाहिए। कई बार उपवास रखने वाली स्त्रियों में मोटापा बढने लगता है, इसलिए भोजन की संतुलित मात्रा पर ध्यान देना आवश्यक है।

6. रक्तचाप, पेप्टिक अल्सर, मधुमेह, अत्यधिक दुर्बलता एवं रक्ताल्पता से पीडित लोगों सहित गर्भवती स्त्रियों को भी उपवास नहींरखना चाहिए। गर्भस्थ शिशु की आवश्यकताएं मां के पोषण पर निर्भर करती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त खुराक लेने की जरूरत होती है।

7. स्वस्थ व्यक्ति ही उपवास रख सकता है। कभी-कभी उपवास रखने से शरीर में हलकापन रहता है, मल-मूत्र विसर्जन सुचारु होता है, भूख बढती है और भोजन में रुचि बढती है, साथ ही चित्त प्रसन्न रहता है। लेकिन कभी भी लंबा उपवास न करें। इससे शरीर व जोडों में दर्द, भूख का ह्रास, भोजन के प्रति अरुचि, गला सूखना, प्यास अधिक लगना एवं कमजोरी महसूस होना जैसे लक्षण पनपते हैं।

8. उपवास रखने के दौरान आराम भी करें। अधिक मेहनत एवं धूप में अधिक समय तक रहने से बचें।

डॉ. अर्चना गुप्ता

चेरी एक फायदे हजार

प्रकृति के इस अनुपम फल में केवल खूबसूरती ही नहीं, फायदे भी हैं। इसे खाने से न केवल दिल के रोगी होने पर अंकुश लगता है, बल्कि कैंसर के खतरे भी कम होते हैं। चेरी में मेलाटोनिन नामक तत्व भरपूर मात्रा में होता है। यह तत्व हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। चेरी में एंथोसाइनिन नामक लाल पिगमेंट भी पाया जाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। विटमिन सी और एंथोसाइनिन से हमारे शरीर में पाया जाने वाला कोलाजेन मजबूत होता है। डॉक्टरों का कहना है कि चेरी हृदयाघात व कैंसर के खतरे को 50 प्रतिशत कम कर देता है। यह आर्थराइटिस, गठिया और सिरदर्द के इलाज में भी सहायक है। इसके अलावा जी मिचलाने और उल्टी की शिकायत भी इस छोटे से फल से दूर हो सकती है। ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और डायरिया के इलाज में भी चेरी मददगार होती है।

डाइटीशियन चेरी को विटमिन सी और के का अच्छा स्त्रोत मानते हैं। इनमें थायमीन, राइबोफ्लैविन, विटमिन बी-6 और पैटोथेनिक अम्ल भी काफी मात्रा में होता है। इसमें नायसिन, फोलेट और विटमिन ए का भी अंश होता है। पोटेशियम और मैगनीज जैसे खनिजों से युक्त चेरी में कॉपर, आयरन, कैल्शियम और फास्फोरस भी संक्षिप्त मात्रा में होते हैं। 100 ग्राम चेरी में 63 कैलरी होती है। इसके फायदों को देखते हुए ही मई में चेरी डेजर्ट डे मनाया जाता है। रेशे से भरपूर चेरी में पानी और कार्बोहाइड्रेट होता है, लेकिन सैचुरेटेड वसा, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम की मात्रा कम होती है।

तौबा करें गुस्से से

हाल ही में हुए अध्ययन से यह पता चला है कि क्रोध और ईष्र्या का कोरोनरी डिजीज से गहरा रिश्ता हो सकता है। इस शोध में दोनों चीजों को हार्ट के लिए बेहद नुकसानदेह पाया गया। ये स्थिति पुरुषों के लिए विशेषकर चिंताजनक थी। जहां आम तौर पर हृदय संबंधी बीमारी होने का खतरा 19 प्रतिशत होता है वहीं पुरुषों में ये खतरा 24 फीसदी तक बढ सकता है। शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि रोजमर्रा की खीझ और तनाव का असर पुरुषों पर ज्यादा होता है। उनकी हिदायत थी कि ऐसे मरीजों को बिहेवियर थेरेपी का सहारा जरूर लेना चाहिए।

सोना कितना सोना है

इस बात को मान लीजिए कि सोना वाकई सेहत के लिए सोना है। अब सवाल यह उठता है कि सोना कितना चाहिए? कामयाब लोग चार से पांच घंटे की नींद को पर्याप्त मानते हैं और उसके पक्ष में दलील देते हैं। बहुत से लोग नौ घंटे की नींद को सही बताते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ रहने के लिए सात से आठ घंटे की नींद पर्याप्त है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान केन्यूरोलॉजिस्ट डॉ.अचल श्रीवास्तव का कहना है कि सुबह संतुष्ट होकर उठें तो समझें कि नींद पूरी हो गई। रात में अकसर जिनकी नींद बार-बार खुलती है उन्हें पूरी नींद के फायदों से वंचित रहना पडता है। नींद पूरी न होने पर काम में मन न लगना, झल्लाना, सिर दर्द होना, चिडचिडाना, मांसपेशियों में खिंचाव तथा याददाश्त में कमी देखी जा सकती है। यहां तक कि डिप्रेशन भी हो सकता है। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. के.के. अग्र वाल का कहना है कि युवाओं सहित सभी के लिए सात से आठ घंटे की नींद जरूरी है।

अन्यथा ब्लड प्रेशर बढ सकता है। नींद आपको रिचार्ज करती है। जिससे शरीर की कोशिकाओं के पुनर्निर्माण का काम होता है। शरीर को आराम मिलने के साथ मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है। इससे पेट ठीक रहता है व देखने-सुनने की इंद्रियां भी ठीक से काम करती हैं। नींद की कमी से दिमाग का न्यूरोट्रांसमीटर हाई हो जाता है, जिससे दिमाग के न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचता है। स्ट्रेस लेवल बढने से सीरम कार्टिजोलिक व अन्य हार्मोस बढने से हृदयरोग, कोरोनरी आर्टरीज, शुगर थायरॉयड तक हो सकता है। अब जान जाइए कि सोना कितना जरूरी है।

संगीत से करें बुद्धि का विकास

केनेडा के शोधकर्ताओं के अनुसार यदि छोटे बच्चों को संगीत का प्रशिक्षण दिया जाए तो उनमें सीखने की कला, याददाश्त तथा आई क्यू लेवल बढता है। शोधकर्ताओं ने चार से छह साल के कुछ बच्चों को दो समूह में बांटा। एक समूह में संगीत सीखने वाले बच्चों को रखा, तो दूसरे में संगीत में रुचि न रखने वाले बच्चों को। एक साल बाद जब शोधकर्ताओं ने इन बच्चों का आई क्यू लेवल और मेमरी टेस्ट लिया तो परिणाम में पाया कि संगीत सीखने वाले बच्चों की याददाश्त, सीखने की क्षमता, गणित और आई क्यू तेज निकला। जबकि वे बच्चे जो संगीत से दूर थे सामान्य ही रहे। यदि आप अपने बच्चे को काबिल बनाने की तमन्ना रखते हैं तो उसकी रुचि संगीत में जगाइए। शायद आपका बच्चा मेधावी बन जाए।

सखी प्रतिनिधि

माइग्रेन में कारगर है अरोमाथेरेपी

माइग्रेन में कारगर है अरोमाथेरेपी

आज की भागदौड भरी जिंदगी में आए दिन सिरदर्द का होना एक आम बात है। माइग्रेन भी सिरदर्द का ही एक प्रकार है, जिसमें सिर के आधे हिस्से में दर्द रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक अरोमाथेरेपी से माइग्रेन को काफी हद तक काबू में किया जा सकता है।

हालांकि माइग्रेन होने का कोई निश्चित कारण नहीं है। सामान्य रूप से सिरदर्द का कारण मस्तिष्क में रक्तवाहिनियों का फैलाव है।

1. माइग्रेन 20 फीसदी पुरुषों व 6 फीसदी महिलाओं में पाया जाता है।

2. सामान्य रूप से चालीस साल के आसपास इसका असर गहरा होता है। तनाव इसका प्रमुख कारण है।

3. हार्मोन परिवर्तन, मासिक चक्र या रजोनिवृत्ति के पूर्व भी माइग्रेन के मामले सामने आते हैं।

माइग्रेन के पीडितों में ये सामान्य लक्षण देखे जाते हैं:

1. व्यवहार में बदलाव (मूड चेंज)

2. शरीर में ऊर्जा का स्तर काफी कम हो जाता है।

3. भूख में भी परिवर्तन होता है।

क्या है अरोमाथेरेपी

कुछ खास तेलों को माइग्रेन दूर करने के लिए फायदेमंद बताया गया है, जिनमें तुलसी, कर्पूरपुष्प, लैवेंडर, काली मिर्च व यूकेलिप्टस मुख्य हैं। इनके तेलों को भाप के रूप में लिया जा सकता है। इन्हें अकेले या एक-दूसरे के साथ मिलाकर भी प्रयोग किया जा सकता है।

एक कटोरे में पानी लेकर तेल की कुछ बूंदें उसमें डाल दें। तेल मिश्रित पानी से गले, सिर, कंधे की मालिश करें। मालिश करते समय ज्यादा रगडें नहीं व उंगलियों का प्रयोग करें। पानी में तेल डालकर उसकी भाप भी ली जा सकती है।

कौन सा तेल, किस में उपयोगी

1. तनाव से सिरदर्द होने पर- लैवेंडर का तेल।

2. पेट खराब या गर्मी लगने पर- तुलसी का तेल।

3. सप्ताहांत में काम की थकान दूर करने के लिए- यूकेलिप्टस का तेल।

4. मासिक धर्म के पूर्व/रजोनिवृत्ति के समय- कर्पूरपुष्प का तेल।

5. नियमित ध्यान या योग करें।

6. हलका भोजन व कम मसाले का प्रयोग करें।

7. कॉफी व शराब का सेवन कम करें।

8. हर्बल चाय का सेवन फायदेमंद रहेगा। ऑक्सीजन से होगा कैंसर का इलाज

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कैंसर केइलाज का नया तरीका खोज निकालने का दावा किया है। कैंसर रिसर्च पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ट्यूमर में ऑक्सीजन देने से कैंसर कोशिकाओं का रक्त प्रवाह बढ जाता है। इसके बाद कीमोथेरेपी (कैंसर की एक चिकित्सापद्धति) ज्यादा प्रभावी हो जाती है।

शोध में कहा गया कि ट्यूमर की रक्तवाहिकाएं काफी क्षतिग्रस्त और कमजोर होती हैं। इसलिए कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं में सामान्य कोशिकाओं के मुकाबले ऑक्सीजन का स्तर काफी कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में कीमोथेरेपी का कोई खास फायदा नहीं होता। वैज्ञानिकों ने अध्ययन में ट्यूमर से ग्रस्त कुछ चूहों को शामिल किया। कुछ दवाओं के इस्तेमाल से इन चूहों के ट्यूमर में ऑक्सीजन की मात्रा बढा दी गई। उन्होंने पाया कि ट्यूमर की रक्त कोशिकाओं का प्रवाह बढ गया। इससे रेडियोथेरेपी के प्रति ट्यूमर की संवेदनशीलता भी बढ गई।

यूके, ग्रे इंस्टीट्यूट फॉर रेडिएशन ऑन्कोलॉजी एंड बायोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर गिलीज मैक्केना ने बताया कि कैंसर के इलाज का नया और अधिक प्रभावी तरीका खोजकर हम बेहद रोमांचित हैं। उन्होंने कहा कि शायद इस नई तकनीक के माध्यम से ट्यूमर से ग्रस्त कोशिकाओं में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढाने में मदद मिले। लेकिन वास्तविकता में कैंसरग्रस्त कोशिकाओं में रक्त की आपूर्ति को बेहतर करके रेडियोथेरेपी व कीमोथेरेपी के उपचार को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ताकि वे ट्यूमर से ग्रस्त कोशिकाओं को खत्म कर सकें। वैज्ञानिकों ने चार दवाओं के प्रभाव का परीक्षण भी किया जो कैंसरथेरेपी के लिए चिकित्सीय इस्तेमाल में लाई जा रही हैं या जिन्हें विकसित किया जा रहा है।

उच्च रक्तचाप से बचाए चुकंदर

चुकंदर का स्वाद बहुत कम लोगों को भाता है, लेकिन यह सेहत के लिए बहुत लाभदायक है। इससे पर्याप्त ऊर्जा मिलती है। आप इसका जूस पीकर बिना थके लंबे समय तक व्यायाम कर सकते हैं। प्रतिदिन एक कप चुकंदर का जूस ब्लड प्रेशर को कम करता है और दिल के लिए भी फायदेमंद है। एक नए अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं ने यह दावा किया है।

जर्नल ऑफ एप्लायड फिजियोलॉजी की रिपोर्ट के मुताबिक, जूस का असर देखने के लिए आठ स्वस्थ पुरुषों का चयन किया गया। इन्हें नियमित रूप से साइकिल चलाने को कहा गया। छह दिनों तक इन सभी को रोजाना चुकंदर का एक ग्लास जूस दिया गया। उनसे धीरे-धीरे साइकिल चलाने को कहा गया। इस दौरान पाया गया कि इन लोगों ने कम ऑक्सीजन ली। इससे निष्कर्ष निकाला गया कि कम ऊर्जा खर्च करके मांसपेशियां उतना ही काम कर रही हैं। इससे 16 प्रतिशत सहनशक्ति बढ जाती है। यानी जो रोज एक घंटे की जॉगिंग करता है वह दस मिनट और ज्यादा करने में सक्षम है। या फिर उतनी ही दूरी को ज्यादा तेजी से कम समय में तय कर सकता है। शोधकर्ता एंडी जोंस के अनुसार, ऑक्सीजन पर चुकंदर के प्रभाव से वह अत्यंत उत्साहित हैं।

सखी प्रतिनिधि

फल-सब्जी में छिपा स्वास्थ्य हमारा

हम सभी स्वस्थ रहना चाहते हैं लेकिन स्वस्थ रहने के लिए जरूरी उपाय कम ही लोग अपनाते हैं। सेहतमंद रहने के लिए हमारा आहार पौष्टिक और संतुलित होना बहुत जरूरी है। प्रकृति ने हमें सेहतमंद रहने के लिए तमाम तरह के फल और सब्जियां प्रदान की हैं, जिन्हें अपनाकर हम सदा हृष्ट-पुष्ट बने रह सकते हैं। सबसे पहले तो हर फल और सब्जी का महत्व जानना जरूरी है, क्योंकि प्रकृतिप्रदत्त यह फल एवं सब्जियां कहीं न कहीं हमारे शरीर के अंगों/हिस्सों के लिए अलग-अलग ढंग से लाभकारी हैं। अगर हम इन्हें कच्चा खाएं तो इनसे बेहतर कुछ भी नहीं। यहां फोर्टिस हॉस्पिटल की डाइटीशियन रुपाली दत्ता बता रही हैं कुछ उपयोगी फलों के बारे में। आप भी जानिए और फलों का भरपूर लाभ उठाइए।

गाजर

कच्ची गाजर को काटकर देखिए। उसका एक टुकडा हमारी आंख की तरह नजर आता है। इस पर पडी प्यूपिल, आइरिस और रेडिएटिंग लकीरें हमारी आंख की तरह दिखती हैं। और विज्ञान ने भी साबित कर दिया है कि गाजर आंख की रोशनी बढाने, उसके रक्त संचार को बढाने के लिए बहुत उपयोगी है। अगर आप अपनी आंखों को स्वस्थ रखना और रोशनी बढाना चाहती हैं तो गाजर का सेवन करें।

एवोकैडो

एवोकैडो, एगप्लांट और नाशपाती स्त्रियों के स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन होते हैं। यह स्त्रियों के गर्भाशय और सर्विक्स के फंक्शन को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं। यह दिखने में भी उसी तरह उन्हीं अंगों जैसे लगते हैं। एक नए शोध से पता चला है कि अगर स्त्री हफ्ते में एक बार एक एवोकैडो खाती है तो उसके हार्मोस संतुलित रहते हैं, गर्भपात नहीं होता और सर्विक्स कैंसर का भी खतरा नहीं होता है। एक एवोकैडो में 14,000 से भी अधिक फोटोलिटिक केमिकल होते हैं। इतने पौष्टिक तत्वों से पूर्ण होने के कारण यह शरीर की रोग प्रतिरोध क्षमता को भी बढाने में मदद करता है।

टमाटर

एक टमाटर में चार चैंबर्स होते हैं और उसका रंग लाल होता है। तो वहीं हमारे हृदय में भी चार चैंबर्स होते है और रंग लाल होता है। शोध से पता चलता है कि टमाटर में लाइकोपीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो हृदय के लिए बहुत जरूरी होता है।

अंगूर

अंगूर के लटके हुए गुच्छे को देखिए, एकदम हमारे हृदय जैसा दिखता है। और प्रत्येक अंगूर ब्लड सेल की तरह लगता है। शोध से यह भी साबित हो चुका है कि अंगूर रक्त को साफकरने वाला नायाब फूड है और दिल के मरीजों के लिए वरदान है।

अखरोट

अखरोट देखने में छोटे दिमाग जैसा लगता है। इसका दायां और बायां गोलार्ध, ऊपरी मस्तिष्क और निचला अनुमस्तिष्क जैसा दिखता है। यहां तक कि उस पर पडी लकीरें या उसके फोल्ड तक नियो-कोरटेक्स जैसे लगते हैं। शोध बताते हैं कि अखरोट तीन दर्जन से भी अधिक न्यूरॉन ट्रांसमीटर्स जो मस्तिष्क प्रक्रिया के लिए जरूरी होते हैं, बनाने में मदद करता है।

सेलरी

सेलरी, बॉक चॉय, रुहबर्ब दिखने में हमारी हड्डियों क ी तरह होता है और यह हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। हड्डियों में 23 प्रतिशत सोडियम होता है और इनमें 23 प्रतिशत सोडियम पाया जाता है। अगर आपको अपने आहार से पर्याप्त सोडियम नहीं मिल पाता है तो आपका शरीर जरूरत पूरी करने के लिए हड्डियों से सोडियम निकालने लगता है, जिससे हड्डियां कमजोर होने का खतरा बढ जाता है। सेलरी या बॉक चॉय खाने से वह जरूरत पूरी की जा सकती है।

अंजीर

यह बीजों से युक्त होता है और पुरुषों के स्पर्म को बढाने में सहायक होता है।

प्याज

प्याज शरीर की कोशिकाओं की तरह दिखता है। शोध के अनुसार यह शरीर की कोशिकाओं को साफ रखने में सहायक होता है। इसे काटने पर आंसू निकलते हैं जिससे आंखों की एपिथेलियल लेयर भी साफ हो जाती है।

राजमा

जैसा कि इसका अंग्रेजी नाम हैं किडनी बींस और दिखता भी हमारी किडनी जैसा ही है। वैज्ञानिक शोधों से यह साबित हो चुका है कि किडनी फंक्शन को बरकरार रखने के लिए राजमा से बढिया कुछ और नहीं।

शकरकंद

यह देखने में पैंक्रियाज की तरह होता है और वास्तव में यह डायबिटीज के ग्लाइसेमिक इंडेक्स संतुलित रखने का काम करता है।

ऑलिव्स

यह ओवरीज के फंक्शन को दुरुस्त रखने में मदद करता है।

संतरा

संतरा, अंगूर और अन्य सिट्रस फल स्त्रियों की स्तनीय ग्रंथियों की तरह दिखते हैं। साथ ही यह स्तनों के स्वास्थ्य और उसकी भीतरी और बाहरी कोशिकाओं की गतिविधियों को सुचारु रखने में भी मदद करते हैं।

इला श्रीवास्तव

सही डाइट तो सर्दियां राइट

शीत ऋतु में शरीर को प्राकृतिक रूप से पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं। यही वह समय भी है, जब शरीर की ऊर्जा में बढोतरी होती है और स्वस्थ रहने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहींकरना पडता। सर्दियों में जितने विटमिंस और पौष्टिक तत्व शरीर को मिलते हैं, वे साल भर शरीर को स्वस्थ बनाए रखते हैं।

जब भी मौसम बदलता है, कुछ मौसमी रोग घेर लेते हैं। गर्मी में जहां लू लगने और सनबर्न जैसी परेशानियां होती हैं, वहीं सर्दियों में सर्दी-जुकाम जैसी आम समस्याएं घेरती हैं। इसलिए सर्द मौसम में भी शारीरिक गतिविधियों को बनाए रखना और सक्रिय रहना जरूरी होता है।

सर्दी में सुस्ती क्यों

इस मौसम में भूख ज्यादा लगती है, दैनिक गतिविधियां थोडी धीमी गति से चलने लगती हैं। मौसम का प्रभाव कुछ ऐसा होता है कि आमतौर पर लोग हाई-कैलरी भोजन लेने लगते हैं, जिसके चलते वजन बढने, अवसाद, फटीग, थकान और एकाग्रचित्तता में कमी जैसे लक्षण उभरते हैं। इसलिए दिनचर्या को व्यवस्थित रखना जरूरी है। सूरज की रौशनी जहां हार्मोन स्तर को सुचारु रखती है, वहीं ताजा हवा में व्यायाम करने से कार्डियो-वैस्कुलर सिस्टम को दुरुस्त रखा जा सकता है।

हार्मोनल बदलाव

1. कोर्टिसोल स्तर में गिरावट होती है, जो हमें सक्रिय और सजग रखता है।

2. मेलाटोनिन ज्यादा बढता है, जिससे अनिद्रा और फटीग जैसी समस्याएं होती हैं। इनका कारण सूर्य की रोशनी का अभाव है। इससे स्त्रियों में अवसाद पनपता है।

यूं तो सर्दियां छुट्टियां और खुशियां मनाने का मौसम है, लेकिन इस मौसम में कई आम समस्याएं भी होती हैं। जैसे-सीजनल एफेक्टिव डिसॉर्डर (सेड), सांस संबंधी परेशानी, कोल्ड-कफ, इनफ्लूएंजा, वजन बढना, त्वचा का रूखा होना और गले में खराश।

सर्दियों में आहार

आयुर्वेद में भोजन के छह स्वाद बताए गए हैं-मीठा, नमकीन, तीखा, कडवा, खट्टा और कसैला। मीठे, खट्टे और नमकीन पदार्थ सर्दियों खासतौर पर सूखी सर्दी में लाभदायक होते हैं। तीखे और मसालेदार खाद्य पदार्थो को इस मौसम में नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि ये शरीर में रूखापन बढाते हैं।

इस मौसम में, शरीर ठंडी हवाओं व मौसम से बचाव के लिए खुद को गर्म रखने के लिए ढेर सारी ऊर्जा पैदा करता है, जिससे भूख बढती है, साथ ही पाचन क्रिया भी मजबूत होती है। चूंकि दिन छोटे होते हैं और शारीरिक क्रियाएं कुछ कम होती हैं, इसलिए गरिष्ठ या तैलीय भोजन से भारीपन महसूस होता है।

इस मौसम में कुछ खाद्य पदार्र्थो को आहार में अवश्य शामिल किया जाना चाहिए। हर भोजन के बाद, यानी दिन में कम से कम तीन बार फल अवश्य लें। जिन लोगों को बीच-बीच में कुछ चबाने की आदत हो, वे फल खाएं, इससे स्वस्थ बने रहेंगे।

फ्रिज का पानी, आइसक्रीम, फ्रोजन खाद्य या पेय पदार्थ इस मौसम में निषिद्ध हैं।

16 टिप्स फिट रहने के

1. खानपान और शारीरिक गतिविधियों के बीच तालमेल हो। सर्दियों में वजन का थोडा बढना बुरा नहींहै, लेकिन जो लोग पहले ही मोटे हैं, उनके लिए यह परेशानी का सबब बन जाता है। ऐसे लोगों को संतुलित भोजन के साथ व्यायाम और शारीरिक सक्रियता की जरूरत होती है।

2. हालांकि सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को हाइड्रेट करने के लिए कुछ-कुछ समय पर पानी पीना जरूरी है। सर्दियों में मौसम रूखा भी होता है, इसमें त्वचा की स्वाभाविक नमी कम होती जाती है। इसे पानी से ही संतुलित किया जा सकता है।

3. फलों और सब्जियों का सूप पीने की आदत डालें। लेकिन क्रीमी कॉकटेल्स को छोडें। ऐसे किसी शेक या पेय पदार्थ से परहेज करें, जिनमें क्रीम और सुगर हो, क्योंकि इनमें बहुत अधिक कैलरी होती हैं।

4. एल्कोहॉल का सेवन संतुलित मात्रा में करें। व्हिस्की कभी ऑन-द-रॉक्स स्टाइल में न पिएं। पार्टी या आयोजनों में कॉकटेल के रूप में ताजा क्रेनबैरी जूस मिनरल वॉटर मिलाकर ले सकते हैं।

5. सर्दियों में धूप न मिलने के कारण विटमिन डी की कमी हो जाती है। ऐसे में सीजनल एफेक्टिव डिसॉर्डर (सेड) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। फिश में विटमिन डी के साथ ही ओमेगा-3 फैटी एसिड्स की बहुतायत होती है, जिससे शरीर में सेरोटोनिन स्तर बढता है और मूड बिगडने या अवसाद की स्थिति से बचाव होता है।

6. चॉकलेट्स को न कह पाना जरा मुश्किल काम है। सर्दियों में तो मीठे का मोह कुछ ज्यादा ही बढ जाता है। चॉकलेट्स खानी ही हैं तो अच्छी क्वालिटी की डार्क चॉकलेट चुनें, जिसमें उच्च मात्रा में कोको तत्व हो, ताकि कोको में पाए जाने वालेएंटीऑक्सीडेंट्स का लाभ मिल सके। सुगरयुक्त या कम गुणवत्ता वाली चॉकलेट्स से दूर ही रहना अच्छा है।

7. भूख लगी हो तो ड्राई फ्रूट्स खा सकते हैं, लेकिन कम मात्रा में। अखरोट सेलेनियम का अच्छा स्रोत है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है, साथ ही अवसाद से बचाता है। इसलिए इस मौसम में अखरोट का सेवन करें।

8. साबुत अनाज जैसे गेहूं, ओट, बाजरा, ब्राउन राइस, दलिया न सिर्फ सुपाच्य होता है, बल्कि हृदय के लिए भी लाभकारी होता है। रिफाइंड या प्रोसेस्ड अनाज का सेवन न करें, क्योंकि इसमें पौष्टिक तत्व कम हो जाते हैं।

9. दही से इम्यून सिस्टम सही होता है। फ्लेवर्ड या मीठे दही के बजाय सादे दही का सेवन करें। दही को स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाने के लिए उसमें ताजे फल मिलाएं।

10. खट्टे फलों में विटमिन सी होता है। संतरे, अंगूर, नीबू, अमरूद जैसे फल शरीर को मजबूत बनाते हैं। विटमिन सी जाडों में इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखता है।

11. हरी पत्तेदार सब्जियों की अहमियत तो हर मौसम में है। नियमित खानपान में कम से कम एक प्लेट गहरी हरी पत्तेदार सब्जियों को अवश्य शामिल करें।

12. सर्दियों में कब्ज या भारीपन से बचने के लिए फाइबरयुक्त खाद्य पदार्थ अवश्य लें। सैलेड्स में अलग प्रकार की सब्जियों-फलों को शामिल करें और इसमें कुछ नए प्रयोग करके इन्हें स्वादिष्ट बनाएं। फैटी सैलेड ड्रेसिंग न करें, क्योंकि इससे सैलेड के पौष्टिक तत्वों में कमी आ जाती है।

13. जंक फूड को नियमित भोजन का हिस्सा न बनाएं। चीनी, फैट, नमक और जंक फूड हमेशा कम मात्रा में लें।

14. खाने की मात्रा पर ध्यान दें। कम मात्रा में दिन में कम से कम तीन बार भोजन करें। स्वादिष्ट होने के साथ ही खाना ताजा होना चाहिए।

15. ब्रेकफस्ट, लंच और डिनर के बीच अंतराल कम रखें। इससे खाने के वक्त भूख ज्यादा नहींलगेगी और वजन संतुलित रहेगा।

16. सर्दियों में वजन कम करना यदि मुश्किल प्रतीत होता हो तो अवसादग्रस्त न हों। क्योंकि जितना सोचेंगे, उतना ही परेशान होंगे और वजन घटाना और मुश्किल होता जाएगा। अपने मौजूदा वजन को ही बरकरार रखने की कोशिश करें। उससे ज्यादा वजन न बढे, इसका खयाल रखें।

इंदिरा